Wednesday, March 28, 2012

Jealous

Sunset, Venice
 पत्ते सूखे हुए हैंजलने में देर नहीं लगती उन्हेंवैसे ही जैसे, तुम्हारी खूबसूरती को कोई और निहारे तो मैं जल उठता हूँपत्ते खुसनसीब हैज़लने के बाद राख बन जाते हैउनका अस्तित्व मिट जाता हैमुझे देखोकल भी वही थाआज भी वही हूँशायद मैं अभी भी हरा हूँचिंगारी बड़ी चाहिए ज़लाने के लिएक्या जला  कर ही दम लोगी?

आग किसी में फर्क नहीं करताहमेशा पूरी कोशिश करता हैज़लाने कीकोशिश मैं भी पूरी करता हूँनहीं ज़लने कीआज तक कामयाब हो पायाआग को देखोबेतहाशा अपने जीतने का ऐलान कर रहा हैकहीं वो आग तुम्ही तो नहीं?

मेरे जलने से तुम्हे ख़ुशी मिलती है, ऐसा तुम जताती होपर जो हल्का सा दर्द है उसे भी तुम उसी हंसी में छुपाती होबारिश तो हो रही हैपर तुम्हारे गीले गाल की वजह कुछ और हैगीले गाल और आँखों में सवाल। बात दर्द सहने की नहीं थी। बात दर्द को हस्ते हुए अपनाने की थी।

'क्या बात है?' तुम ये पूछती हो मुझसे हर बार। मैं कहता 'कुछ नहीं'। जिनके पास कहने को कुछ नहीं होता, उन्हें मुझे सुनना अच्छा लगता है। शायद ये बीमारी तुम्हे भी है। 'कुछ नहीं' सुनने के बाद भी आँखों से मुझे टटोलती रहती हो। मेरे चेहरे पर वही धुंडने की कोशिश करती हो जिसे मैं छुपाने की कोशिश करता हूँ।

जिसने तुम्हारी तरफ कभी देखा ही नहीं, वो तुम्हारी नज़रों में कैसे कैद होगा?  जिसकी आखें कभी खुली ही नहीं, उसे क्या आँखें बंद होने का डर होगा? मेरे तो दिन भी अंधकार में गुजरते है। मुझे कहाँ सूरज के ढलने का डर होगा। जिसने रात भर तन्हाई की चीखें सुनी हो, उन्हें हलकी से आहट से भी डर होगा। नशे में तो ज़िन्दगी भर था। अब मुझे नशा उतरने का डर है।

शाम हो चली है। सब के घर वापिस आने का वक़्त हो रहा है। और मेरा घर से बाहर निकलने का।  कुछ देर साथ में चलोगी? बस आगे जो मोड़ है, वहीँ तक। इतना वक़्त काफी है मेरे लिए। इन लम्हों को मन में बार बार याद कर रात आराम से गुजर जाएगी। उसी मोड़ पर एक दूकान है। चाय पत्ती ख़त्म हो गयी है। वापस  आते समय  ले लूँगा। फिर रात अपनी और तुम्हारी याद अपनी। सवालों को कुछ देर के  लिए अपने पीछे छोड़ते है। कहो, क्या ख्याल है?

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Happy reading :-)

                                                                             - HAUSLE BULAND

Tuesday, March 6, 2012

Chai thandi ho rahi hai..

Lake Zurich at Night

What was mine once. It is  now yours to cherish. 

सितारे थोड़ी दूर लग रहे थे । ओस की हर बूँद को ही टूटा हुआ तारा मान लिया

यह कहना गलत होगा की मैं सही था यह कहना भी गलत होगा की मैं गलत था कभी कभी बीच की दीवार इतनी मोटी होती है की उस पर खड़े हो कर ऐसा एहसास होता है की आप दीवार के एक तरफ ज्यादा हो और दूसरी ओर कम पर गौर कीजियेगा की मैंने यह नहीं कहा की आप एक तरफ हो और दूसरी ओर नहीं सिर्फ ऐसा प्रतीत होता है दूर से देखने पर ये पता लगाना मुश्किल है की दीवार कितनी मोटी है इरादों की दीवार उमीदों की दीवार भावनाओ की दीवार प्रश्नों की दीवार पर दुनिया की नज़रों का क्या कहना बिना देखे, बिना सुने, बिना समझे ही सलाह देना चाहती है उन्हें यह पता नहीं की बेघर होना हमें अच्छा लगता है फिर भी सहारा देना चाहती है

मैं जानता हूँ की मैंने एक बार तुमसे कहा था की हमारे बीच में कुछ शब्द जैसे 'लेकिन', 'परन्तु', 'शायद', यह कभी नहीं लाऊंगा पर कभी कभी चाहते हुए भी इन शब्दों का सहारा लेना पड़ता है  दिल की बातों को अनसुना कर ख्वाबों का पीछा करना छोड़ना पड़ता है मरने के बाद भी सांस लेने का सच्चा बहाना करना पड़ता है। मैं जानता हूँ की तुम क्या कहोगीमत कहोमैं उन्हें पहले ही सुन चूका हूँकसूर किसी का नहीं हैआँखों को पढना कभी कभी मुश्किल होता है, अब मैं जानता हूँ

 तुम मेरे लिए जियो और मैं तुम्हारे लिए मरू, अब शायद येही बाकी रह गया हैवो एक वजह जिसके लिए जीना भी मंजूर हो और मरना भी, आज कल की दुनिया में ऐसा कहाँ कोई होता हैमैं अभी भी थोडा पुराने ज़माने का हूँ, तुम गलत नहीं कहती थीइतने दिनों के बाद तो तुम्हे आज हस्ते देखा है, इतने सारे हस्ते हुए चेहरों के बीच में रह कर भीदीवाना ही बंद कमरे में रोता है

दिल कांच का है तो क्या हुआ? दरार आसानी से ज़रूर जाएगी, पर टूटने में वक़्त लगेगावो अलग बात है की एक बार टूट गया तो दिल टूटने का डर हट जायेगाआंच थोड़ी कम हैजलने में वक़्त लगेगा। सच आधा है, समझाने में थोड़ी मुश्किल होगी। कहानी लम्बी है, पूरी बताने में वक़्त लगेगा । चाय मेज पर रख आया था, ठंडी हो रही होगी ।  ठंडी चाय पी कर तुम्हारी यादें ताज़ा रखना अब शायद येही बाकी रह गया है

You can breathe now. And I have to perish.

डूबने का डर तो नहीं था, फिर भी तुम्हारे हाथ को किनारा मान लिया
                                              तुम्हारे साथ को सहारा मान  लिया